ओडिशा राज्यसभा चुनाव: बिछने लगी रणनीतिक बिसात, डॉ. पबित्र सामंतराय के नाम की चर्चा तेज़
भुवनेश्वर / नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
ओडिशा की राजनीति इस वक्त एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। 16 मार्च 2026 को होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए चुनाव आयोग (ECI) की अधिसूचना जारी होते ही राज्य के सियासी गलियारों में हलचल चरम पर पहुंच गई है। 2 अप्रैल को खाली हो रही 4 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होकर 5 मार्च तक चलेगी।
सीटों का गणित और समीकरण
147 सदस्यीय विधानसभा में संख्याबल के आधार पर मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है:
भाजपा (79 विधायक + 3 निर्दलीय): दो सीटें सुरक्षित करने की मजबूत स्थिति में।
बीजेडी: अपनी ताकत के दम पर एक सीट आसानी से जीत सकती है।
चौथी सीट का सस्पेंस: असली पेंच चौथी सीट पर फंसा है, जहां गठबंधन और “रणनीतिक सूझबूझ” की अग्निपरीक्षा होनी है।
संभावित उम्मीदवारों पर टिकी निगाहें
भाजपा खेमे से ममता मोहंता के पुनर्नामांकन की चर्चा के साथ-साथ एक नया और प्रभावशाली नाम उभरकर सामने आया है— डॉ. पबित्र मोहन सामंतराय।
कौन हैं डॉ. पबित्र मोहन सामंतराय?
मीडिया और राजनीतिक गलियारों में डॉ. सामंतराय की संभावित उम्मीदवारी ने हलचल तेज कर दी है। उनके व्यक्तित्व के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं:
वरिष्ठ पत्रकार: ‘ओड़िया दैनिक पर्यवेक्षक’ और ‘द कलिंग क्रॉनिकल’ के संपादक-इन-चीफ।
सामाजिक कद: चार दशकों से शिक्षा, वैदिक ज्ञान और संस्कृति के पुनर्जागरण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय।
राजनीतिक अनुभव: वर्ष 2009 में भाजपा के टिकट पर बड़चाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं।
मीडिया अधिकार: राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों के कल्याण और संस्थागत सुरक्षा के लिए एक प्रखर आवाज।
सूत्रों का दावा: उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, डॉ. सामंतराय के नाम पर अनौपचारिक सहमति बन सकती है, जो ओडिशा से लेकर दिल्ली तक के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
‘मौन समझौता’ या ‘राज्य हित’?
विपक्ष (कांग्रेस) लगातार भाजपा और बीजेडी के बीच गुप्त समझौते के आरोप लगा रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि कोई सामंजस्य बनता भी है, तो उसे “राज्य के विकास और हित” का नाम दिया जा सकता है।
चुनाव का टाइमलाइन
कार्यक्रम तिथि
नामांकन शुरू 26 फरवरी 2026
नामांकन की अंतिम तिथि 05 मार्च 2026
मतदान की तिथि 16 मार्च 2026
सीटें रिक्त होने की तिथि 02 अप्रैल 2026
निष्कर्ष:
यह चुनाव केवल चार सांसदों को चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह 2026 के बदलते राजनीतिक ध्रुवीकरण का लिटमस टेस्ट है। क्या भाजपा अपने रणनीतिक चेहरों के दम पर बाजी मारेगी या बीजेडी कोई नया दांव खेलेगी? सबकी नजरें अब 5 मार्च की नामांकन सूची पर टिकी हैं।
